याद तेरी रात भर का जागरण दे जाएगी 

स्वप्न की भाषा को लेकिन व्याकरण दे जाएगी 

क्या खबर थी एक दिन उसकी जुदाई अये अनुराग 

चांदनी को धूप का सा आचरण दे जाएगी

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