तुम अगर पतवार देते
डूबती नैया न मेरी तुम अगर पतवार देते!
एक स्वर संकेत का जीवन चलाता,
कूल पर नैया नहीं पतवार जाता,
पथ न चलता,पाँव पंथी हीं बढ़ाता,
पार जाकर गीत गाता तुम अगर झंकार देते!
चाहिए इंसान को इंसान केवल,
है अगर भगवान तो इंसान केवल,
हो रहा मैं आज कातर देख पल- पल,
स्वयं मैं भगवान होता तुम अगर अधिकार देते!
आ रही है मौत की घाटी निकटतर,
जा रही है जिंदगी मेरी सरककर,
मानवों! मुझको पकड़ लो आज कसकर,
मैं मरण से जूझता यदि सांत्वना दो चार देते!
एक स्वर संकेत का जीवन चलाता,
कूल पर नैया नहीं पतवार जाता,
पथ न चलता,पाँव पंथी हीं बढ़ाता,
पार जाकर गीत गाता तुम अगर झंकार देते!
चाहिए इंसान को इंसान केवल,
है अगर भगवान तो इंसान केवल,
हो रहा मैं आज कातर देख पल- पल,
स्वयं मैं भगवान होता तुम अगर अधिकार देते!
आ रही है मौत की घाटी निकटतर,
जा रही है जिंदगी मेरी सरककर,
मानवों! मुझको पकड़ लो आज कसकर,
मैं मरण से जूझता यदि सांत्वना दो चार देते!
- शिवदेव शर्मा 'पथिक'
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