3 याद में तेरी गीत लिखूँ

 याद में तेरी गीत लिखूँ या आँसू  हार  बनाऊँ...

पास नहीं तुम वीराने में क्या  त्योहार  मनाऊँ...


मिलकर ही जाना था तुमको तो   पहले कह देते 

अगर जानते रोना होगा नाम ना तेरा लेते

तू कह तो आँसू से गीतों का सृंगार

सजाऊँ

याद में तेरी गीत लिखूँ या आँसू हार बनाऊँ



तुम कहते हो रो मत पगली कल फिर मिलना होगा

आशा की टहनी पर कलियों का आ  खिलना होगा

पथ पर नैन बिछाऊँ या फूलों से द्वार सजाऊँ।

याद में तेरी गीत लिखूँ या आँसू  हार बनाऊँ।।


आस मिलन की लिए मगन 

विरहन तेरी फिरती है।

भीग नयन उठते हैं जब सुधियों की घटा घिरती है।।

यूँ हीं तडपूँ मर जाऊँँ या जीकर  प्राण  जलाऊँ।

याद में  तेरी  गीत लिखूँ या  आँसू  हार  बनाऊँ।।


सुन लेना इन गीतों को तुम रिमझिम बरसातों में।

और नहीं कुछ देने को बाकी मेरे  हाथों में ।।

वर्षा आज प्रतीक्षा की मैं  कैसे  रात बिताऊँ।

याद में तेरी गीत लिखूँ  या आँसू हार बनाऊँ ।।


जब से दूर हुए तुम आँखों मे बरसात जगी है

तुमको मेरी कसम न रोना चिंता एक लगी है

तेरी पलकों पर चुम्बन की कैसे आड

बनाऊँ

याद में तेरी गीत लिखूं या आँसू हार बनाऊँ 



 "पथिक रचना"

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