18.देश का सिपाही

 



देश का सिपाही आया, घर त्यौहार लाया,

झूम-झूम फागुनी बयार चली सजनी।


खींचकर बालकों को सीने से लगाया जब,

छलका अपार प्यार, आँखियों से सजनी।


पिया ने गुलाल डाड़, होड़ी पे किया शृंगार,

देख देख पिया को ही सज गई सजनी।


रंगों में जँचे अधिक अपना तिरंगा जिसे ,

वारी ऐसे पिया पे हजार बार सजनी।

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