5.हुक्का
हुक्का और सिगरेट
पीती हुई गाँव की दादियाँ
मुझे अच्छी लगतीं
चारों ओर हुक्के से निकलने वाली एक अजीब सी मादक सुगंध...
हाँ मैं उसे सुगंध हीं कहूँगी
मन उनके आसपास हीं जमा रहता। वो गाँव भर की
इस घर से उस घर की
बातें करती हँसतीं
बीच-बीच में
अपने पोपले मुख से
हुक्का खींचती
धुआँ और गुड़-गुड़ की आवाज निकालती दादियाँ
मुझे बड़ी सम्मोहक लगतीं
उनके चेहरे पर
तृप्ति के भाव होते
वह सुखविभोर चमकती आँखें
मुझे आज भी अपने आसपास दिखाई देती हैं
वही सुगंध
अपने आसपास महसूस करती हूँ
तो क्या
उन्हें कोई तकलीफ न थी!?
हुक्का और सिगरेट
पीती हुई गाँव की दादियाँ
मुझे अच्छी लगतीं
चारों ओर हुक्के से निकलने वाली एक अजीब सी मादक सुगंध...
हाँ मैं उसे सुगंध हीं कहूँगी
मन उनके आसपास हीं जमा रहता। वो गाँव भर की
इस घर से उस घर की
बातें करती हँसतीं
बीच-बीच में
अपने पोपले मुख से
हुक्का खींचती
धुआँ और गुड़-गुड़ की आवाज निकालती दादियाँ
मुझे बड़ी सम्मोहक लगतीं
उनके चेहरे पर
तृप्ति के भाव होते
वह सुखविभोर चमकती आँखें
मुझे आज भी अपने आसपास दिखाई देती हैं
वही सुगंध
अपने आसपास महसूस करती हूँ
तो क्या
उन्हें कोई तकलीफ न थी!?
उन्हें कोई दुख सालता न था ?
क्या हुक्का पीने मात्र से...!?
आज भी
हुक्का पीने की हुड़क
जागती है मुझ में
और
मेरे आसपास बिछी वो आँखें मुस्कुराती हैं
शायद मेरे अकेलेपन पर...
उन्हें कोई दुख सालता न था ?
क्या हुक्का पीने मात्र से...!?
आज भी
हुक्का पीने की हुड़क
जागती है मुझ में
और
मेरे आसपास बिछी वो आँखें मुस्कुराती हैं
शायद मेरे अकेलेपन पर...
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