11.अपनी परछाईं से दूरी लगती है
अपनी परछाई से दूरी लगती है
दुनिया अनचीन्ही अनजानी लगती है
छोड़ो दुनिया की बात करेगा क्या
कोई
हर रिश्ते की बखिया उधड़ी सी लगती है
दिल निचोड़ कर अपना रेगिस्तान किया
अब आँखो की बगिया सूखी लगती है
जहर पचाना होता खेल नहीं लेकिन
जहरीले की फितरत डसना लगती है
चल रही हवा माकूल शहर की थी
लेकिन
किसी की नादानी से आँधी आई लगती है
व्हतुर सयाने कुछ होते कोयल जैसे
चालाकों को चोट कहाँ कब लगती हैं
पलक पांँवड़े बिस्तर दो पालो पोसो
सुनो पथिक! करुणा मूरख की
लगती है
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