12 गर्मी मे गर्म
गर्मी में गर्म, सर्द हीं होती है सर्दी में...
किसने कहा था ये! हवा विपरीत चलती है
पंथ ये प्यारा है पथिक, पाँव जब चलें...
चल लो... नहीं तो जिंदगी फिर हाथ मलती है
जो भाग्य सिकंदर सा हुआ तो भी क्या हुआ!
किस्मत है, कभी भी कहीं भी... सबको छलती है
जिनके लिए हो कर गए तुम खर्च जिंदगी...
तुमपर किया... तो उनको... दवाई भी खलती है
मालूम थी ये बात, मेरा कोई भी नहीं...
मुट्ठी में बांध... रेत को देखो... फिसलती है
पथिक रचना
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