पटरियों पर पैसेंजर 

ट्रेन की तरह धीरे धीरे

कई रिश्ते घिसटते है

स्टेशन आता है 

और कुछ रिश्तों की 

मंजिल आ जाती है 

सफ़र समाप्त हो जाता है 

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