6.घर एक नही है

 देखते हीं देखते वो एक 

प्रतिमा रेत होकर ढह गई

मैंने जिस प्रतिमा को पूजा 

बाद केवल तट बचा था  

नदी पूरी बह गई


अक्सर पार्क में चली जाती हूँ

जहाँ गिलहरियाँ पेड़ पर बैठ 

खाती रहती हैं

दोनों हाथों से खाती हुई 

कुछ-कुछ गिराती हुई 

दौड़ती-भागती 

उधम मचाती गिलहरियाँ 

मुझे बहुत प्यारी लगती हैं

वे खूब सारी बातें करती हैं 

शोर मचाती हैं

शाम होने लगती है 

गुलाबी रंग का आसमान 

पेड़ों के मध्य सरकता है 

उन किरणों में मैं भी 

गुलाबी सी होने लगती हूँ 

सभी पंछी अपने घर 

मतलब पार्क में 

लौटने लगते हैं 

वे कई तरह के हैं 

और वे भी खूब चहकते हैं

सूखे हुए पत्तों पर मेरे चलने की

एक लयबद्ध आवाज़ आ रही है 

पार्क में सुरीला शोर है 

मैं वक्त को पकड़ लेना चाहती हूँ

कभी-कभी मैं 

और कुछ नहीं देखती  सिर्फ गिलहरियों को देखती-सुनती  

खो जाती हूँ 

उनका प्यार से बातें करना 

अक्सर पार्क में चली जाती हूँ

जहाँ गिलहरियाँ पेड़ पर बैठ 

खाती रहती हैं

दोनों हाथों से खाती हुई 

कुछ-कुछ गिराती हुई 

दौड़ती-भागती 

उधम मचाती गिलहरियाँ 

मुझे बहुत प्यारी लगती हैं

वे खूब सारी बातें करती हैं 

शोर मचाती हैं

शाम होने लगती है 

गुलाबी रंग का आसमान 

पेड़ों के मध्य सरकता है 

उन किरणों में मैं भी 

गुलाबी सी होने लगती हूँ 

सभी पंछी अपने घर 

मतलब पार्क में 

लौटने लगते हैं 

वे कई तरह के हैं 

और वे भी खूब चहकते हैं

सूखे हुए पत्तों पर मेरे चलने की

एक लयबद्ध आवाज़ आ रही है 

पार्क में सुरीला शोर है 

मैं वक्त को पकड़ लेना चाहती हूँ

कभी-कभी मैं 

और कुछ नहीं देखती  सिर्फ गिलहरियों को देखती-सुनती  

खो जाती हूँ 

उनका प्यार से बातें करना 

मुझे मेरे भाई-बहनों की 

याद दिलाता है 

मैं अकेले में बुदबुदाती हूँ

कि अब हमारा घर एक नहीं है   

मैं पार्क से अपने घर को 

लौट आती हूँ


 


मुझे मेरे भाई-बहनों की 

याद दिलाता है 

मैं अकेले में बुदबुदाती हूँ

कि अब हमारा घर एक नहीं है   

मैं पार्क से अपने घर को 

लौट आती हूँ


 

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