9.लग गई खबर दुनिया को
लग गई खबर दुनिया को,
तुम्हारे प्यार में हूँ मैं ...
मंदिर की मूरत जैसे,
दिव्य आकार में हूँ मैं...
बरसों से इस पीड़ा को,
मैं गुनते गुनते हारी...
बरसी ना कभी बदरिया,
बावरिया रही कँवारी...
कल-कल बहती नदियों की,
अविरल रफ्तार में हूँ मैं...
लग गई खबर दुनिया को,
तुम्हारे प्यार में हूँ मैं...
तुम तृप्ति हो मैं तृष्णा,
यह मिलन अनोखा होगा...
कब प्रणय बँधा है बाँधे,
दुनिया को धोखा होगा...
उमा-पार्वती शिव की,
अनेकों बार में हूँ मैं...
लग गई खबर दुनिया को,
तुम्हारे प्यार में हूँ मैं...
अपयश सारा मैं रख लूँ,
तेरे हिस्से यश आए ...
अधिकार तुम्हारा इतना,
बस तू मुझ पर वश पाए...
खरपतवारों सी उपजी,
सभी दुत्कार में हूँ मैं ...
लग गई खबर दुनिया को,
तुम्हारे प्यार में हूँ मैं...
~ रचना पथिक
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