55.Muskuraht
नमन मंच
06/11/2019
"निमंत्रण"
मुस्कुराहट को निमंत्रण भेजकर
खोलती हूँ मैं हृदय के द्वार
स्नेह-संबल हर दुखी इंसान का
भेंट करती यह विजय का हार ।।
फेंककर गंभीरता का आवरण
हो निमंत्रित मुस्कुराती छाँव
थम नहीं जाए कहीं यह क्रम कभी
मुश्किलों से थक रहें जब पाँव।।
नफरतों की ढ़ाह दे दीवार जो
है बड़ी शक्ति छुपी इस भाव में
मुस्कुराहट पाटती दूरी सभी
मुस्कुराना है खुशी की चाव में।।
स्वरचित "पथिक रचना"
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