50. Bharat ka अभिमान
भारत का अभिमान तिरंगा,
लहर-लहर लहराने दो।
नवयुग को इक नई प्रभाती
नूतन स्वर में गाने दो।
झंडा लहरा-लहरा कर जब,छूता है अंबर का माथा।
दिशा-दिशा गुंजित करता है, गाकर वह वीरों की गाथा।
अमर शहीदों की कुर्बानी,
व्यर्थ नहीं तुम जाने दो।
भारत का अभिमान तिरंगा,
लहर-लहर लहराने दो।
पथ के शोलों से, अंगारों से,चट्टानों से नहीं डरे।
आजादी की सौगंध लिए,सीने पर खाकर चोट मरे।
है पराधीनता तम गहरा,स्वर्णिम किरणें सज जाने दो।
भारत का अभिमान तिरंगा,लहर लहर-लहराने दो।
जागो भारत के नौनिहाल,अब वक्त नहीं है सोने का।
अक्षुण्ण एकता बनी रहे,लो प्रण कण-कण संजोने का।
बंदूकों के तोपों के युग का,
अब युगांत हो जाने दो।
भारत का अभिमान तिरंगा,
लहर-लहर लहराने दो।
फूलों से कलियों से घर-घर,
बंदनवार सजाने दो।
भारत का अभिमान तिरंगा,
लहर-लहर लहराने दो।
नवयुग को एक नई प्रभाती,
नूतन स्वर में गाने दो।
भारत का अभिमान तिरंगा,
लहर-लहर लहराने दो।
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