49. Shiv ki jataon

 समेटे जो मुझे! वो वक्ष वो काँधा नहीं है

अभी शिव की जटाओं ने मुझे बाँधा नहीं है

मैं मिट्टी हूँ वो पावन, जो भीगी सुरसरित से  

मेरे कुम्भार ने मुझको अभी राँधा नहीं है

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