47. Ab to lagata
अब तो लगता है पता जैसे हमारा खो गया है।
दिल तुम्हारा और तुम्हारा बस तुम्हारा हो गया है।।
हारकर आना, लगा है जीत सा।
प्राण में झँकृत हुआ संगीत सा।
आपको तो शौक गीतों का रहा,
हम भी देखो कह रहे कुछ प्रीत सा।।
रेत में जैसे हरी सी दूब
कोई बो गया है
दिल तुम्हारा और तुम्हारा बस तुम्हारा हो गया है
दीप का भी आज उद्दीपन प्रबल।
ज्योति की रेखा अमावस पर सबल।
चाँद तारे सब हमारी गोद में ,
प्रेम की तपभूमि है मन आजकल।।
साधना से सिद्धि पाकर एक योगी सो गया है
दिल तुम्हारा और तुम्हारा बस तुम्हारा
हो गया है
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