45.kitne arse bad

 कितने अरसे बाद घिरे घन 

कब बरसें कब बरसें।


बेशक आमादा हैं ऐसे 

अब बरसें तब बरसें।।


मैं हूँ बेकल सूखी सरिता

हरी-भरी हो जाऊँ।


तन-मन सराबोर हो जब 

बरसें तो जमकर बरसें।।

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