38.chandni sath

  मैं और तुम चुपचाप रहे

और करती रही चाँदनी बात...


थे खामोश सितारे भी

और चलता रहा चाँद चुप साथ

मैं और तुम चुपचाप रहे

और करती रही चाँदनी बात...


बारिश की रिमझिम भी चुप थी

नदिया बहती थी चुपचाप...

लब से हम कुछ कहके 

बोल पड़ीं आँखे सब बात


जग सारा ही गुम हो जैसे 

प्रेम मिलन अनुपम सौगात

मैं और तुम चुपचाप रहे

और करती रही चाँदनी बात...


खामोशी में है इक साज

हम दोनों एक धुन बन जाऐं

खामोशी में है अल्फाज

आओ हमतुम मिल कर गाएँ...


आशाओं की किरण सजाए

जुगनूon की hai baरात

मैं और तुम चुपचाप रहे

और करती रही चाँदनी बात...


रजनी भी खामोश रही

और चुपके प्रात चली आई

सूरज की बाँहों से पिघली

पुलकित गात चली आई...


शब्द रुके से हैं होठों पे

आँखों से होती बरसात

मैं और तुम चुपचाप रहे

और करती रही चाँदनी बात...


चुपके से दिल मिल  जाते 

          प्रीत

मधु-गागर ले खिल जाते हैं

भ्रमर सदा फूलों के मीत...


चुप-चुप दीया-बाती जलते

जलता रहा पतंगा साथ

मैं और तुम चुपचाप रहे

और करती रही चाँदनी बात.. 


---'पथिक रचना'


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