2 अब तो लगता है पता
अब तो लगता है, पता जैसे हमारा खो गया है।
दिल तुम्हारा और तुम्हारा बस तुम्हारा हो गया है।।
हारकर आना, लगा है जीत सा।
प्राण में झँकृत हुआ संगीत सा।
आपकोतो शौक गीतों का रहा,
हम भी देखो कह रहे कुछ प्रीत सा।।
रेत में जैसे हरी सी दूब कोई बो गया है।
दिल तुम्हारा और तुम्हारा बस तुम्हारा हो गया है।।
दीप का भी आज उद्दीपन प्रबल।
ज्योति की रेखा अमावस पर सबल।
चाँद- तारे सब हमारी गोद में ,
प्रेम की तपभूमि है मन आजकल।।
साधना से सिद्धि पाकर एक योगी सो गया है।
दिल तुम्हारा और तुम्हारा बस तुम्हारा
हो गया है।।
"मौन से है मौन का अनुबंध अब।
बाँचते नयना मृदुल संबंध अब।
रेख अपने भाग्य की अब मिल गयी,
हो गयी ध्वनि धड़कनों की छंद अब।।
मुख तुम्हारा आजकल प्रतिबिम्ब मेरा हो गया है।
दिल तुम्हारा और तुम्हारा बस तुम्हारा हो गया है।।
-पथिक रचना
Comments
Post a Comment