मौसम बदलने दो

मुसाफिर! जिंदगी की रात का मौसम बदलने दो!

नई झंकार निकलेगी ठहर सरगम बदलने दो!

 

सुनहले प्रात का सूरज किरण का गान गाएगा, 

कुहा को ची‌‌ड़ता कोई किरण- तूफान आएगा, 

उठाकर मे‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‍घ का आॉंचल दिवस की दूतिका आए,

मृत्युंजय तुम बढ़े जाओ मरण का मान शरमाए!


ठठाकर हॉंस पड़े जीवन मरण का तम बदलने दो! 

मुसाफिर! जिंदगी की रात का मौसम बदलने दो!

 

चढ़ाई पर चढ़े जाओ कि जीना ही चढ़ाई है, 

दिए जब ज्ञान के जलते न सोचो रात आई है, 

तिमिर ही तो करेगा कल ललककर रश्मि अभिनंदन, 

पसीने से बहाए जा बटोही रेत के कण- कण!

 

सृजन की बाढ़ आएगी क्षणिक शबनम बदलने दो! 

मुसाफिर! जिंदगी की रात का मौसम बदलने दो!


बुझेगी प्यास प्यासों की सुधा का स्रोत फूटेगा, 

समुंदर की लहर क्या है प्रगति का पोत छूटेगा, 

बहुत अंगार है पथ पर चरण में रक्त भी तो है,

सहम कर लौट जाना क्या अभी कुछ वक्त भी तो है! 


जमाने को बदलना है स्वरों का सम बदलने दो!

मुसाफिर जिंदगी की रात का मौसम बदलने दो!

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