मन का खलिहान बचाए जा

 तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!
कट रहा न्याय का गला मगर अपना ईमान बचाए जा!

जग जुटा रहा चाँदी लेकिन तुमको चाँदनी जुटानी है,
सब लुटा रहे अपनी लज्जा तुमको प्रेरणा लुटानी है,
युग जगा रहा विध्वंस अरे तुमको तो सृजन जगाना है,
हैं अँधेरे के चोर बहुत दीपक तो तुम्हें जलाना है।

रण भेरी लाख गरजती हो तू गीत बीन पर गाए जा!
तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!

इस महापाप की बेला में कुछ पुण्य बचाए चलना है,
है महाप्रलय की आशंका निर्माण पंथ पर जलना है,
जग के शोणित से सने हाथ तू बनो अर्चना की बाती, 
इतिहास युद्ध के मोटे हैं,छोटी मधुमासों की पाती।

सो रहा जमाना फूलों पर,काँटों में पाँव बढ़ाए जा!
तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!

पगले  जीवन के मेले में साथी किस किस को मिलते हैं,
त्योहार विदा का लगा हुआ कुछ फूल झड़े, कुछ खिलते हैं, 
कुछ ऐसे भी जो धरती पर अमरत्व खिलाकर जाते हैं,
प्यासे मानव के प्राणों को पुरुषत्व पिलाकर जाते हैं।

दुनिया सोती है इससे क्या? तू घर घर अलख जगाए जा!
तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!

बन्ध जाएगी सारी धरती आवाज न बंधने पाएगी,
कब ताजमहल ढह जाएगा मुमताज खड़ी मुस्काएगी,
मिल जाएँगे राही चलकर सौ साल निशानी जिएगी,
गाँधी गोली से मरे मगर सौ साल जवानी जिएगी।

भगीरथ के बेटे जीएंँगे स्वर की गंगा लहराए जा!
तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!

ईसा की छाती पर कीलें गाँधी के सीने पर गोली,
अंधा मानव मानवता के लोहू से खेल रहा होली,
मूरख आदमी गढ़ा करता आदमी वंश का ही विनाश,
माँ के सीनों पर बेटों की लाशों के ऊपर पड़ी लाश।

सीना है माँ का मरघट की ज्वाला से
इसे बचाए जा!
तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!

ओ नीलकंठ तुम युग-युग के साँपों का गरल पचा लो अब,
यह महानाश की बेला है वंशी का रास रचा लो अब,
यह समरभूमि! तुम राधा को अपने हीं पास बुला लो अब,
अंगारों से भर रही डगर मीरा को यहीं नचा लो अब।

हो शांतिपूर्ण युग मानव के चेतन में धूम मचाए जा!
तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!

बढ़ रहे कला के दुःशासन बाँहों को चीर बढ़ाने दो,
हिंसा की भूखी धरती है गौतम को पाठ पढ़ाने दो,
मत लड़ो पतन के लिए अरे!बापू का गाँव बसाना है,
कुरुक्षेत्र कृष्ण का लाल तुम्हें फिर वृन्दावन लौटाना है।

ओ कलाकार तुम रुको नहीं नवयुग की कलम चलाए जा!
तन जलता है तो जलने दे मन का खलिहान बचाए जा!

Comments

Popular posts from this blog

जनता जाग रही है

हलचल मन के गाँव में

तुम अगर पतवार देते